“आरती गजबदन विनायक की” भगवान श्री गणेश जी को समर्पित एक प्रसिद्ध आरती है। इसमें गणपति बप्पा के गजानन (हाथी के समान मुख), विघ्नहर्ता स्वरूप और मंगलकारी शक्ति का गुणगान किया जाता है। यह आरती विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, बुधवार, शुभ कार्यों की शुरुआत और दैनिक पूजा में गाई जाती है।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, विवाह, गृह प्रवेश या नई शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है ताकि सभी विघ्न दूर हों और कार्य सफल हो।
गणेश आरती जानकारी
| भजन नाम | आरती गजबदन विनायक की |
| देवता | गणेश |
| भाषा | हिन्दी |
| प्रकार | आरती |
श्री गणेश जी की आरती लिरिक्स हिंदी में
आरती गजबदन विनायक की।
सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
एकदन्त शशिभाल गजानन,
विघ्नविनाशक शुभगुण कानन।
शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,
दुःखविनाशक सुखदायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति।
अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति,
विद्या-विनय-विभव-दायककी॥
आरती गजबदन विनायक की॥
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर,
धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर।
लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥