श्रीगुरु चरण सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि।बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥
“तनोतु नः शिवः शिवम्”